ॐ (प्रणव) का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व — ब्रह्मांड का मूल अनाहत नाद
अ-उ-म की त्रिवेणी — सृजन, पालन, संहार और तुरीय चेतना का दिव्य प्रतीक
ॐ (प्रणव) का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व — ब्रह्मांड का मूल अनाहत नाद (Audio)
ॐ (प्रणव) का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व — ब्रह्मांड का मूल अनाहत नाद पाठ
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन् मामनुस्मरन्।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्॥
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्॥
गीता वचन (8.13): जो पुरुष ‘ॐ’ इस एक अक्षर रूप ब्रह्म का उच्चारण करता हुआ और मेरा स्मरण करता हुआ शरीर त्याग करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।
ॐ (प्रणव) का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व — ब्रह्मांड का मूल अनाहत नाद का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ
🕉️ ॐ की त्रिवेणी (अ, उ, म) का रहस्य
माण्डूक्योपनिषद के अनुसार प्रणव ॐ तीन ध्वनियों और एक मौन से मिलकर बना है:
- अ (A): जाग्रत अवस्था, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, और स्थूल शरीर का वाचक।
- उ (U): स्वप्न अवस्था, पालनकर्ता विष्णु, और सूक्ष्म शरीर का वाचक।
- म (M): सुषुप्ति (गहरी निद्रा) अवस्था, संहारकर्ता शिव, और कारण शरीर का वाचक।
- नाद-बिन्दु (Silent Anahata): तुरीय अवस्था, परब्रह्म का शाश्वत अव्यक्त स्वरूप।
🔬 वैज्ञानिक शोध एवं जप के लाभ
आधुनिक ध्वनि विज्ञान और न्यूरोबायोलॉजी ने प्रमाणित किया है कि 432 Hz की प्राकृतिक आवृत्ति पर जब ॐ का गुंजन किया जाता है, तो यह थायरॉइड ग्रंथि, वोकल कॉर्ड्स और वेगस नर्व को उत्तेजित कर शरीर में डोपामाइन और सेरोटोनिन (शांतिदायक हार्मोन) का स्राव बढ़ाता है तथा रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
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