मंदिर एवं तीर्थ
काशी विश्वनाथ मंदिर — इतिहास, महिमा, त्रिशूल पर बसी काशी एवं दर्शन
अविमुक्त क्षेत्र वाराणसी — जहां साक्षात महादेव मृत्यु के समय तारक मंत्र देते हैं
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काशी विश्वनाथ मंदिर — इतिहास, महिमा, त्रिशूल पर बसी काशी एवं दर्शन
वाराणस्यां स्थितो देवः सर्वपापप्रणाशनः।
तस्य दर्शनमात्रेण मुच्यते सर्वकिल्बिषैः॥
तस्य दर्शनमात्रेण मुच्यते सर्वकिल्बिषैः॥
काशी महात्म्य: वाराणसी में विराजमान देवाधिदेव विश्वनाथ समस्त पापों का नाश करने वाले हैं। उनके दर्शन मात्र से जीव समस्त बंधनों से मुक्त हो जाता है।
🔱 काशी का आध्यात्मिक स्वरूप
काशी विश्व की सबसे प्राचीनतम जीवंत नगरी है। स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार प्रलय काल में भी काशी नष्ट नहीं होती, क्योंकि भगवान शिव इसे अपने त्रिशूल की नोक पर धारण कर लेते हैं। इसे ‘आनंदवन’ और ‘अविमुक्त क्षेत्र’ कहा गया है। यहां गंगा उत्तरवाहिनी होकर भगवान शिव के चरणों का वंदन करती हैं।
🪔 मुक्ति का पावन द्वार
काशी में देहत्याग करने वाले किसी भी जीव के कान में स्वयं भगवान विश्वनाथ ‘तारक राम मंत्र’ फूंकते हैं, जिससे उसे सीधे मोक्ष प्राप्त होता है। अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित यह स्वर्ण मंदिर और आधुनिक काशी विश्वनाथ धाम भारत की आध्यात्मिक अस्मिता का अमर केंद्र है।