देवता
समुद्र मंथन की संपूर्ण कथा — अमृत, हलाहल और भगवान शिव का नीलकंठ स्वरूप
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥ भावार्थ: जो कर्पूर के समान...
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