हिंदू संस्कृति एवं परंपरा
तुलसी का हिंदू धर्म में महत्व — हरिप्रिया वृंदा, नित्य पूजन एवं संजीवनी औषधीय गुण
सनातन आंगन की अधिष्ठात्री — मोक्षदायिनी, प्रदूषण नाशक और असीम आरोग्य प्रदाता
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तुलसी का हिंदू धर्म में महत्व — हरिप्रिया वृंदा, नित्य पूजन एवं संजीवनी औषधीय गुण
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया॥
वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नन्दिनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया॥
वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नन्दिनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥
तुलसी नामाष्टक: वृंदा, वृंदावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी—ये तुलसी जी के 8 पावन नाम समस्त पापों और दरिद्रता को हरने वाले हैं।
🌿 भगवान विष्णु के भोग में तुलसी की अनिवार्यता
सनातन मान्यता के अनुसार भगवान श्री हरि विष्णु तुलसी दल के बिना कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते। पद्म पुराण में कहा गया है कि जिस घर में तुलसी का हरा-भरा पौधा होता है, उस घर में यमदूत कभी प्रवेश नहीं कर सकते और वहां साक्षात वैकुंठ का वास होता है।
🩺 तुलसी के वैज्ञानिक एवं औषधीय लाभ
तुलसी 24 घंटे में से लगभग 20 घंटे ऑक्सीजन और ओजोन का उत्सर्जन करती है। यह वातावरण के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करती है। तुलसी के 4 पत्ते प्रतिदिन खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है, खांसी-जुकाम और श्वास रोग दूर होते हैं। सांध्यकाल में तुलसी के नीचे गाय के घी का दीपक जलाना परम पुण्यदायी है।