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रुद्राक्ष का धार्मिक एवं स्वास्थ्य महत्व — शिव के अश्रु, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक शक्ति व मुखी भेद
रुद्र + अक्ष अर्थात् महादेव के करुणा अश्रु — सुरक्षा, ध्यान और आरोग्य का महाकवच
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रुद्राक्ष का धार्मिक एवं स्वास्थ्य महत्व — शिव के अश्रु, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक शक्ति व मुखी भेद
रुद्राक्षधारणादेव मुच्यते सर्वकिल्बिषैः।
यथा शिवस्तथा सोऽपि पूज्यते सर्वमानवैः॥
यथा शिवस्तथा सोऽपि पूज्यते सर्वमानवैः॥
शिवपुराण वचन: रुद्राक्ष धारण करने मात्र से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। जो श्रद्धा से रुद्राक्ष धारण करता है, वह साक्षात शिव के समान पूज्य हो जाता है।
🌿 रुद्राक्ष की उत्पत्ति एवं वैज्ञानिक गुण
संसार के कल्याण हेतु जब भगवान शिव ने हजारों वर्षों तक ध्यान लगाया और जब उनके नेत्र खुले, तो उनकी आंखों से करुणा के जो आंसू पृथ्वी पर गिरे, उनसे इलायोकार्पस गैनिट्रस (रुद्राक्ष) के वृक्ष उत्पन्न हुए।
वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार रुद्राक्ष में डाय-इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक गुण होते हैं, जो हृदय की धड़कन (Heart Beat) को स्थिर रखते हैं, उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को रोकते हैं।
वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार रुद्राक्ष में डाय-इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक गुण होते हैं, जो हृदय की धड़कन (Heart Beat) को स्थिर रखते हैं, उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को रोकते हैं।
🔱 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष का महत्व
एक मुखी रुद्राक्ष साक्षात शिव स्वरूप है जो ब्रह्मज्ञान देता है। पंचमुखी रुद्राक्ष कालाग्नि रुद्र का प्रतीक है जो सर्वसुलभ और पारिवारिक शांति के लिए श्रेष्ठ है। सात मुखी महालक्ष्मी और आठ मुखी गणेश जी का प्रतीक है। रुद्राक्ष को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध कर सोमवार या महाशिवरात्रि के दिन लाल धागे में धारण करना चाहिए।