भगवान श्री कृष्ण — बाल लीलाएं, कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश एवं भक्ति रहस्य
सोलह कलाओं के पूर्ण अवतार — प्रेम, नीति, कर्मयोग और आनंद के साक्षात विग्रह
भगवान श्री कृष्ण — बाल लीलाएं, कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश एवं भक्ति रहस्य (Audio)
भगवान श्री कृष्ण — बाल लीलाएं, कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश एवं भक्ति रहस्य पाठ
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
भगवान श्री कृष्ण — बाल लीलाएं, कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश एवं भक्ति रहस्य का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ
🦚 श्री कृष्ण का पूर्ण अवतार स्वरूप
भगवान श्री कृष्ण सनातन धर्म में ‘पूर्णब्रह्म’ के रूप में पूजित हैं। गोकुल में माखनचोर के रूप में भक्तों के चित्त का हरण करने वाले, वृंदावन में महारास रचाकर जीवात्मा-परमात्मा के मिलन का संदेश देने वाले, और कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर ज्ञान देने वाले जगद्गुरु हैं।
🪔 निष्काम कर्मयोग और शरणागति
श्री कृष्ण की शिक्षा का मूल आधार है: “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”—कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता में अपनी शांति मत खोओ। और अंत में वे कहते हैं: “सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज”—समस्त चिंताओं को त्यागकर मेरी शरण में आओ, मैं तुम्हें समस्त पापों और बंधनों से मुक्त कर दूंगा।
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