बच्चों के लिए 5 सरल एवं कल्याणकारी संस्कृत श्लोक — अर्थ, उच्चारण एवं नित्य संस्कार
कराग्रे वसते लक्ष्मी, त्वमेव माता, गुरुर्ब्रह्मा — बच्चों में संस्कार और एकाग्रता बढ़ाने वाले श्लोक
बच्चों के लिए 5 सरल एवं कल्याणकारी संस्कृत श्लोक — अर्थ, उच्चारण एवं नित्य संस्कार (Audio)
बच्चों के लिए 5 सरल एवं कल्याणकारी संस्कृत श्लोक — अर्थ, उच्चारण एवं नित्य संस्कार पाठ
१. कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
प्रातः कर-दर्शन: हाथ के आगे भाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में गोविंद बसते हैं। इसलिए सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए।
बच्चों के लिए 5 सरल एवं कल्याणकारी संस्कृत श्लोक — अर्थ, उच्चारण एवं नित्य संस्कार का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ
📜 बच्चों के लिए 4 अन्य आवश्यक श्लोक
२. माता-पिता वंदना:
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
३. गुरु वंदना:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
४. विश्व शांति प्रार्थना:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
५. भोजन मंत्र:
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
३. गुरु वंदना:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
४. विश्व शांति प्रार्थना:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
५. भोजन मंत्र:
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
🌟 संस्कृत श्लोक से बच्चों को लाभ
संस्कृत के शुद्ध मंत्रों और श्लोकों के उच्चारण से बच्चों की जिह्वा का विकास होता है, याददाश्त (मेमोरी) तीव्र होती है और मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध सक्रिय होते हैं। ये श्लोक बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्म-अनुशासन के बीज बोते हैं।
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