ॐ गं गणपतये नमः — श्री गणेश बीज मंत्र का अर्थ, महत्व एवं नित्य जप विधि
विघ्नों के समूल नाश और ऋद्धि-सिद्धि प्राप्ति का सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः — श्री गणेश बीज मंत्र का अर्थ, महत्व एवं नित्य जप विधि (Audio)
ॐ गं गणपतये नमः — श्री गणेश बीज मंत्र का अर्थ, महत्व एवं नित्य जप विधि पाठ
ॐ गं गणपतये नमः
सरल भावार्थ: ॐ के साथ हम भगवान गणपति (समस्त गणों के स्वामी) के पावन बीज ‘गं’ का ध्यान करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः — श्री गणेश बीज मंत्र का अर्थ, महत्व एवं नित्य जप विधि का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ
🐘 बीज मंत्र ‘गं’ का गूढ़ आध्यात्मिक विज्ञान
गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार “गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनन्तरम्। अनुस्वारः परतरः। अर्धेन्दुलसितम्। तारेण ऋद्धम्। एतत्तव मनुस्वरूपम्।”
अर्थात् ‘ग’ कार गणेश जी का साक्षात स्वरूप है, बिन्दु (अनुस्वार) उनका ब्रह्म स्वरूप है और ॐ परब्रह्म का वाचक है। यह बीज मंत्र मूलाधार चक्र को जाग्रत कर साधक को स्थिरता और कुशाग्र बुद्धि प्रदान करता है।
अर्थात् ‘ग’ कार गणेश जी का साक्षात स्वरूप है, बिन्दु (अनुस्वार) उनका ब्रह्म स्वरूप है और ॐ परब्रह्म का वाचक है। यह बीज मंत्र मूलाधार चक्र को जाग्रत कर साधक को स्थिरता और कुशाग्र बुद्धि प्रदान करता है।
🌸 जप के नियम एवं फल
बुधवार के दिन पीले वस्त्र धारण कर, दूर्वा की 21 गांठें गणेश जी को अर्पित करके इस मंत्र की 1, 3 अथवा 5 माला जप करने से व्यापार में उन्नति, विद्या में सफलता और पारिवारिक विघ्नों का समूल नाश होता है।
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