BHARATIYADOOT धर्म | संस्कृति | हमारी पहचान

Ganesh Chalisa

सम्पूर्ण आरती, हिन्दी भावार्थ एवं नित्य पूजा विधि

श्री गणेश चालीसा — जय गणपति सदगुण सदन, सम्पूर्ण पाठ

विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य श्री गणेश की कृपा प्रदाता पावन चालीसा

श्री गणेश चालीसा — जय गणपति सदगुण सदन, सम्पूर्ण पाठ (Audio)
00:00 / 05:12 🔊
श्री गणेश चालीसा — जय गणपति सदगुण सदन, सम्पूर्ण पाठ पाठ
॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥
जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजे। चरण पादुका मुनि मन राजे॥
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति विचित्र अति मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि शिशु रूपा॥
अति आनन्द मगन सब भाई। कंचन सिंहासन बैठाई॥
शनि सब देवन मिलि जब आये। लखि न सके मुख शीश नवाये॥
शनि की दृष्टि परो जब जाई। शीश उड़्यो तब गगन समाई॥
हाहाकार मच्चो कैलाशा। भयो विषण्ण मन गिरिजा पासा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटि शीश गज को ले आयो॥
धड़ पर शीश लगाय संवारा। प्राण प्रतिष्ठा कीन्ह पुरारा॥
नाम गणेश शम्भु तब दीन्हा। प्रथम पूज्य अधिकार सु दीन्हा॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव लीन्हा। परिक्रमा पृथ्वी की दीन्हा॥
षडानन चलि गयो भ्रम माहीं। तुम बैठे प्रभु मात-पिता हीं॥
चरण पखारि परिक्रमा कीन्हा। मात-पिता महं जग लखि लीन्हा॥
सकल देव अस्तुति करि हारे। प्रथम पूज्य तब शम्भु उचारे॥
विघ्न हरण सब काज संवारे। जो सुमिरै संकट सब टारे॥
नित नेम करि चालीसा गावै। सब सुख भोगि परमपद पावै॥
॥ दोहा ॥
संवत तीनि सहस्र महं, चालीसा शुभ सार।
अयोध्यादास पूरण भयो, गणेश कृपा अपार॥
श्री गणेश चालीसा — जय गणपति सदगुण सदन, सम्पूर्ण पाठ का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ

🐘 श्री गणेश चालीसा का सार

इस चालीसा में गणेश जी के प्राकट्य, उनके गजमुख धारण करने की पावन कथा, माता-पिता की परिक्रमा द्वारा प्रथम पूज्य पद प्राप्त करने का रहस्य और भक्तों के संकट हरने की दयालुता का सुंदर वर्णन है।

🌸 नित्य पाठ विधि

बुधवार और संकष्टी चतुर्थी पर दूर्वा, गुड़ और मोदक अर्पित कर गणेश चालीसा का पाठ करने से समस्त अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और विद्या-बुद्धि में वृद्धि होती है।

संबंधित सामग्री
भक्ति, शक्ति और सेवा का पावन पथ

सनातन संस्कृति की अमर धरोहर को अपने जीवन में उतारें और आत्मिक शांति का अनुभव करें।

और जानें →
📩 नवीनतम अपडेट पाएं

नित्य आरती, मंत्र एवं त्योहारों की जानकारी सीधे अपने ईमेल पर प्राप्त करें।

संबंधित पावन रचनाएं

श्रद्धालु टिप्पणियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *