BHARATIYADOOT धर्म | संस्कृति | हमारी पहचान

Shiv Chalisa

सम्पूर्ण आरती, हिन्दी भावार्थ एवं नित्य पूजा विधि

शिव चालीसा — सम्पूर्ण 40 चौपाइयां, दोहा एवं नित्य पाठ विधि

देवाधिदेव महादेव शिव शंकर की कृपा एवं सर्वसंकट निवारक पावन चालीसा

शिव चालीसा — सम्पूर्ण 40 चौपाइयां, दोहा एवं नित्य पाठ विधि (Audio)
00:00 / 05:12 🔊
शिव चालीसा — सम्पूर्ण 40 चौपाइयां, दोहा एवं नित्य पाठ विधि पाठ
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
॥ चौपाई ॥
जय गिरिजापति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत शुचि भाल। करत सदा शत्रुन क्षय काला॥
नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही तुम प्रभु आपु संभारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा करि लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक अस्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटे उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ गोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु संकर। भये प्रसन्न दियो इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घट वासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
ले त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा ही। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक सुयश न गाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत शम्भु सहाई॥
ऋनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावनकारी॥
संभव यह चालीसा जो गावे। सब सुख भोग परम पद पावे॥
॥ दोहा ॥
नित नेम करि प्रातः ही, पाठ करै चालीस।
तुम मेरी मनकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
शिव चालीसा — सम्पूर्ण 40 चौपाइयां, दोहा एवं नित्य पाठ विधि का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ

🔱 शिव चालीसा का सार

शिव चालीसा में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनकी दयालुता, नीलकंठ स्वरूप, समुद्र मंथन में विषपान की घटना और भक्तों पर उनकी सहज कृपा का अत्यंत सुंदर वर्णन है। औढरदानी भगवान शिव अति अल्प सेवा से भी प्रसन्न होकर भक्तों के समस्त संकटों का शमन करते हैं।

🌿 सोमवार एवं प्रदोष पाठ विधि

सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करने के उपरांत पूर्व मुख बैठकर शिव चालीसा का पाठ करें। इससे कुंडली के चंद्र और शनि दोष शांत होते हैं तथा मानसिक शांति मिलती है।

संबंधित सामग्री
भक्ति, शक्ति और सेवा का पावन पथ

सनातन संस्कृति की अमर धरोहर को अपने जीवन में उतारें और आत्मिक शांति का अनुभव करें।

और जानें →
📩 नवीनतम अपडेट पाएं

नित्य आरती, मंत्र एवं त्योहारों की जानकारी सीधे अपने ईमेल पर प्राप्त करें।

संबंधित पावन रचनाएं

श्रद्धालु टिप्पणियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *