दैनिक पूजा की सरल एवं प्रामाणिक विधि — पंचोपचार, षोडशोपचार एवं नियम
गृहस्थों के लिए प्रतिदिन ईश्वर आराधना का सरल, शास्त्रीय एवं फलदायी क्रम
दैनिक पूजा की सरल एवं प्रामाणिक विधि — पंचोपचार, षोडशोपचार एवं नियम (Audio)
दैनिक पूजा की सरल एवं प्रामाणिक विधि — पंचोपचार, षोडशोपचार एवं नियम पाठ
अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
पवित्रीकरण मंत्र: मनुष्य चाहे किसी भी अवस्था में हो, अपवित्र हो या पवित्र, कमल नयन भगवान पुण्डरीकाक्ष (श्री हरि) का स्मरण करते ही वह बाहर और भीतर दोनों से पूर्णतः पवित्र हो जाता है।
दैनिक पूजा की सरल एवं प्रामाणिक विधि — पंचोपचार, षोडशोपचार एवं नियम का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ
🪔 दैनिक पूजा के 5 अनिवार्य चरण (पंचोपचार)
यदि समय कम हो तो प्रतिदिन पंचोपचार विधि से पूजा अवश्य करनी चाहिए:
- १. गंध (Chandan): भगवान को अनामिका अंगुली से रोली, चंदन अथवा कुमकुम का तिलक लगाएं।
- २. पुष्प (Flowers): ताजे, सुगंधित पुष्प और अक्षत श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- ३. धूप (Dhoop/Incense): गुग्गल अथवा धूपबत्ती से वातावरण को सुगंधित और जीवाणुरहित बनाएं।
- ४. दीप (Diya/Light): गाय के घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाकर भगवान को दिखाएं।
- ५. नैवेद्य (Bhog/Food): ऋतुफल, बताशे, मिश्री, गुड़ अथवा घर पर बना सात्विक भोजन अर्पित करें और आचमन कराएं।
🌸 पूजा के समय ध्यान रखने योग्य 5 नियम
१. पूजा सदैव पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊन के आसन पर बैठकर करें। २. मंदिर में खंडित मूर्तियां या सूखे बासी फूल कभी न रखें। ३. पूजा प्रारंभ करते समय सर्वप्रथम गणेश जी का ध्यान करें। ४. आरती के उपरांत परिक्रमा अवश्य करें। ५. अंत में क्षमा प्रार्थना (“आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्…”) बोलें।
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