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Nature And Environment Conservation In Sanatan Dharma

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सनातन धर्म में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण

ईशावास्यमिदं सर्वम् — पंचमहाभूत, नदियां माता, वृक्ष देव और समस्त जीवों में एकात्म चेतना का दर्शन

सनातन धर्म में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण (Audio)
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सनातन धर्म में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। — अथर्ववेद १२/१/१२

द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः॥
वैदिक शांति पाठ: यह भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूँ। द्युलोक, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियां, वनस्पतियां, समस्त देवगण और संपूर्ण ब्रह्मांड में शांति का विस्तार हो।
सनातन धर्म में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का महत्व

आज जब पूरा संसार ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन से त्रस्त है, सनातन धर्म का वसुधैव कुटुम्बकम् और प्रकृति-पूजन का दर्शन ही मानवता को विनाश से बचा सकता है।

सनातन धर्म विश्व की एकमात्र ऐसी संस्कृति है जिसने प्रकृति के प्रत्येक अंग को देवत्व का स्थान दिया है। नदियां माता, वृक्ष देव, और पर्वत पर्यावरण की रीढ़ हैं।

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