BHARATIYADOOT धर्म | संस्कृति | हमारी पहचान

Durga Chalisa

सम्पूर्ण आरती, हिन्दी भावार्थ एवं नित्य पूजा विधि

श्री दुर्गा चालीसा — नमो नमो दुर्गे सुख करनी, सम्पूर्ण पाठ

आदिशक्ति मां भगवती जगदम्बा की कृपा एवं समस्त भय निवारक चालीसा

श्री दुर्गा चालीसा — नमो नमो दुर्गे सुख करनी, सम्पूर्ण पाठ (Audio)
00:00 / 05:12 🔊
श्री दुर्गा चालीसा — नमो नमो दुर्गे सुख करनी, सम्पूर्ण पाठ पाठ
॥ दोहा ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
॥ चौपाई ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरा रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्नभाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावै। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहू काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछतायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपु मुरख मोहि अति डरपावैं॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला॥
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
श्री दुर्गा चालीसा — नमो नमो दुर्गे सुख करनी, सम्पूर्ण पाठ का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ

🌺 दुर्गा चालीसा का महत्व

मां दुर्गा की इस पावन चालीसा में नवदुर्गा, दस महाविद्याओं और मां के दिव्य पराक्रम का स्मरण है। जो साधक नित्य श्रद्धा से इसका पाठ करता है, उसके शत्रु, भय, दरिद्रता और मानसिक व्याधियां तत्काल समाप्त हो जाती हैं।

🪔 पाठ के नियम

शुक्रवार एवं नवरात्रि में लाल चंदन अथवा रुद्राक्ष माला के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर दुर्गा चालीसा का पाठ करने से परिवार में सुख-समृद्धि और आरोग्य की वृद्धि होती है।

संबंधित सामग्री
भक्ति, शक्ति और सेवा का पावन पथ

सनातन संस्कृति की अमर धरोहर को अपने जीवन में उतारें और आत्मिक शांति का अनुभव करें।

और जानें →
📩 नवीनतम अपडेट पाएं

नित्य आरती, मंत्र एवं त्योहारों की जानकारी सीधे अपने ईमेल पर प्राप्त करें।

संबंधित पावन रचनाएं

श्रद्धालु टिप्पणियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *