
कलियुग में प्रत्यक्ष जाग्रत देव माने जाने वाले संकटमोचन पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सबसे प्रसिद्ध और सिद्ध आरती “आरती कीजै हनुमान लला की” है। यह आरती संत कवि रामानंद जी द्वारा रचित मानी जाती है। इसमें हनुमान जी के शौर्य, पराक्रम, प्रभु श्रीराम की अनन्य सेवा और उनके मंगलकारी स्वरूप का अनुपम गुणगान है।
श्री हनुमान जी की आरती — आरती कीजै हनुमान लला की का सम्पूर्ण पावन पाठ
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपै।
रोग दोष जाके निकट न झांपै॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की…
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की…
लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि संजीवन प्रान उबारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की…
पैठि पाताल तोरि जम-कारे।
अहिरावन की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दहिने भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की…
सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥
आरती कीजै हनुमान लला की…
जो हनुमान जी की आरती गावै।
बसि बैकुंठ परम पद पावै॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
आरती करने की सरल एवं प्रामाणिक विधि
- मंगलवार अथवा शनिवार को प्रातः या सायं स्वच्छ लाल/पीले वस्त्र पहनकर हनुमान जी के सम्मुख बैठें।
- चमेली के तेल का दीपक अथवा शुद्ध गाय के घी का दीपक सिंदूर मिलाकर प्रज्वलित करें।
- हनुमान जी को लाल पुष्प, तुलसी दल और बूंदी या गुड़-चने का भोग अर्पित करें।
- आरती थाल को दोनों हाथों से श्रद्धापूर्वक पकड़कर सात बार परिक्रमा भाव से घुमाएं।
- आरती के समय ताली, शंख और घंटी का मधुर वादन करें।
आरती का आध्यात्मिक महत्व एवं लाभ
हनुमान जी की आरती के नियमित पाठ से भूत-पिशाच, भय, मानसिक तनाव, ग्रह दोष और शनि साढ़ेसाती की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। यह आरती भक्त में असीम साहस, आत्मविश्वास और बल का संचार करती है।
आरती कब और किस समय करें?
प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को संध्या आरती के समय यह पाठ विशेष फलदायी है। हनुमान जयंती और सुंदरकांड पाठ के उपरांत इस आरती का गायन अनिवार्य माना गया है।
आरती एवं देवता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
मान्यता है कि जहाँ भी प्रभु श्रीराम की कथा या हनुमान जी की आरती होती है, वहाँ पवनपुत्र हनुमान जी सूक्ष्म रूप में उपस्थित रहते हैं। आरती में तुलसी दल का भोग लगाने से हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
निष्कर्ष एवं पावन प्रार्थना
हे अंजनीनंदन, वायुपुत्र, महाबली संकटमोचन हनुमान जी! हमारे समस्त संकटों का निवारण कर हमें अपने श्रीचरणों में अनन्य भक्ति प्रदान करें। जय श्री राम! जय वीर हनुमान!