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श्री गणेश जी की आरती — जय गणेश देवा

सम्पूर्ण पाठ, हिन्दी भावार्थ, नित्य पाठ फल एवं पूजा विधि

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श्री गणेश जी की आरती — जय गणेश देवा
श्री गणेश जी की आरती — जय गणेश देवा

सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा अथवा अनुष्ठान के प्रारंभ में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी की वंदना और आरती करने का विधान है। “जय गणेश देवा” आरती सर्वाधिक लोकप्रिय, पारंपरिक एवं सिद्ध मानी जाती है। मान्यता है कि सच्चे भाव से इस आरती का नित्य गायन करने से जीवन के समस्त विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और ऋद्धि-सिद्धि व सुख-समृद्धि का वास होता है।

श्री गणेश जी की आरती — जय गणेश देवा का सम्पूर्ण पावन पाठ

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एक दन्त दयावन्त चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…

अन्धन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…

दीनन की लाज राखो शम्भु सुत वारी।
कामना को पूर्ण करो जग बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

आरती करने की सरल एवं प्रामाणिक विधि

  1. आरती प्रारंभ करने से पूर्व शुद्ध जल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा की थाली में शुद्ध गाय के घी का दीपक अथवा कर्पूर, रोली, अक्षत, दुर्वा और मोदक/लड्डू रखें।
  3. दीपक प्रज्वलित कर भगवान श्री गणेश के चरणों से प्रारंभ करते हुए दक्षिणावर्त (घड़ी की सुई की दिशा) में घुमाएं।
  4. चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुखमंडल पर एक बार और अंत में संपूर्ण स्वरूप पर सात बार आरती घुमाएं।
  5. आरती के उपरांत शंख व घंटी की ध्वनि के साथ कर्पूरगौरं मंत्र का जप करें और सभी भक्तजन आरती ग्रहण करें।

आरती का आध्यात्मिक महत्व एवं लाभ

भगवान गणेश विघ्नहर्ता और बुद्धि प्रदाता हैं। इनकी आरती के गायन से बुद्धि, विवेक, विद्या और यश की वृद्धि होती है। यह आरती घर-परिवार से नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर शांति और समृद्धि लाती है।

आरती कब और किस समय करें?

श्री गणेश जी की आरती प्रातःकालीन पूजा और सायंकालीन संध्या आरती के समय विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। प्रत्येक बुधवार, संकष्टी चतुर्थी एवं गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर इसका पाठ अति शुभ माना गया है।

आरती एवं देवता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

भगवान गणेश जी को मोदक और दूर्वा अति प्रिय हैं। आरती करते समय दूर्वा अर्पित करने से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पुराणों के अनुसार, आरती के समय मन में किसी भी प्रकार का दुर्भाव न रखकर एकाग्र चित्त से आराधना करनी चाहिए।

निष्कर्ष एवं पावन प्रार्थना

हे विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश! हमारे जीवन के समस्त संताप और विघ्न हरकर हमें सद्बुद्धि, आरोग्यता और सुख-शांति प्रदान करें। ॐ गं गणपतये नमः।

भारतीयदूत संपादकीय मंडल

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