BHARATIYADOOT धर्म | संस्कृति | हमारी पहचान

Purnima Vrat Vidhi

सम्पूर्ण आरती, हिन्दी भावार्थ एवं नित्य पूजा विधि

पूर्णिमा व्रत — श्री सत्यनारायण पूजन, चंद्र अर्घ्य एवं 12 पूर्णिमा महत्व

चंद्रमा की पूर्ण कलाओं का पावन पर्व — सुख, समृद्धि और आत्मशांति का व्रत

पूर्णिमा व्रत — श्री सत्यनारायण पूजन, चंद्र अर्घ्य एवं 12 पूर्णिमा महत्व (Audio)
00:00 / 05:12 🔊
पूर्णिमा व्रत — श्री सत्यनारायण पूजन, चंद्र अर्घ्य एवं 12 पूर्णिमा महत्व पाठ
क्षीरोदार्णवसम्भूते अत्रेर्नेत्रसमुद्भव।
गृहाणार्घ्यं शशाङ्केश रोहिण्यासहितो मम॥
चंद्र अर्घ्य मंत्र: हे क्षीरसागर से उत्पन्न, महर्षि अत्रि के नेत्रों से प्रादुर्भूत, रोहिणी के पति चंद्रमा! आप कृपा करके मेरा यह अर्घ्य स्वीकार करें।
पूर्णिमा व्रत — श्री सत्यनारायण पूजन, चंद्र अर्घ्य एवं 12 पूर्णिमा महत्व का महत्व एवं आध्यात्मिक लाभ

🌕 पूर्णिमा व्रत के नियम एवं सत्यनारायण कथा

पूर्णिमा तिथि प्रकृति और मानव शरीर में जल तत्व के पूर्ण संतुलन की तिथि है। इस दिन व्रत रखकर भगवान श्री सत्यनारायण की कथा सुनना सनातन धर्म की अति प्राचीन परंपरा है। पंजिरी (गेहूं का भुना आटा, चीनी और तुलसी दल), पंचामृत और केले का प्रसाद बनाकर परिवार सहित कथा श्रवण करने से घर का वातावरण शांत और पवित्र होता है।

🌟 वर्ष की प्रमुख पूर्णिमा तिथियां

वर्ष में 12 पूर्णिमाएं होती हैं, जिनमें शरद पूर्णिमा (अमृत वर्षा), गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली), और माघ पूर्णिमा का महात्म्य शास्त्रों में सर्वोच्च कहा गया है। रात्रि में चंद्रमा को कच्चे दूध मिश्रित जल का अर्घ्य देने से मानसिक तनाव और अनिद्रा का निवारण होता है।

संबंधित सामग्री
भक्ति, शक्ति और सेवा का पावन पथ

सनातन संस्कृति की अमर धरोहर को अपने जीवन में उतारें और आत्मिक शांति का अनुभव करें।

और जानें →
📩 नवीनतम अपडेट पाएं

नित्य आरती, मंत्र एवं त्योहारों की जानकारी सीधे अपने ईमेल पर प्राप्त करें।

संबंधित पावन रचनाएं

श्रद्धालु टिप्पणियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *