
धन, धान्य, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी की आरती “ॐ जय लक्ष्मी माता” सनातन घरों में नित्य संध्याकाल में गाई जाने वाली परम पावन आरती है। समुद्र मंथन से प्रकट हुईं माँ लक्ष्मी श्रीहरि विष्णु की अर्धांगिनी हैं और जो भक्त निर्मल भाव से इनकी आरती करता है, उसके घर में कभी दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता।
श्री लक्ष्मी माता की आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता का सम्पूर्ण पावन पाठ
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहिं पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
उर आनन्द समावे, पाप उतर जावे॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
आरती करने की सरल एवं प्रामाणिक विधि
- सायंकाल घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीप जलाएं।
- पूजा की थाली में शुद्ध गाय के घी का नौ बाती वाला या एकमुखी दीपक, कमल पुष्प, बताशे और खीर रखें।
- माँ लक्ष्मी के साथ भगवान श्री गणेश और श्रीहरि विष्णु का भी ध्यान करें।
- आरती को मधुर ध्वनि में गाते हुए दक्षिणावर्त दिशा में घुमाएं।
- आरती के उपरांत माँ को खीर का भोग लगाकर घर के सभी सदस्यों में बांटें।
आरती का आध्यात्मिक महत्व एवं लाभ
माँ लक्ष्मी की आरती से अष्टलक्ष्मी (धन, विद्या, यश, संतान, धैर्य आदि) की प्राप्ति होती है। यह आरती घर से कलह, दरिद्रता और आर्थिक संकटों को समूल नष्ट कर देती है।
आरती कब और किस समय करें?
दीपावली, धनतेरस, शरद पूर्णिमा और प्रत्येक शुक्रवार की सायं गोधूलि वेला में माँ लक्ष्मी की आरती करना अत्यंत फलदायी होता है।
आरती एवं देवता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
माँ लक्ष्मी को कमल का पुष्प अत्यंत प्रिय है क्योंकि यह कीचड़ में रहकर भी निर्लिप्त और पावन रहता है। माँ वहीं वास करती हैं जहाँ स्वच्छता, शांति और स्त्रियों का सम्मान होता है।
निष्कर्ष एवं पावन प्रार्थना
हे क्षीरसागर कन्या, महालक्ष्मी माता! हमारे गृह में सदैव स्थिर रूप से वास करें और अपनी कृपा दृष्टि से हमें सुख, शांति और ऐश्वर्य प्रदान करें। ॐ महालक्ष्म्यै नमः।