पंचांग एवं मुहूर्त
हिंदू पंचांग क्या है? — पांच अंगों का विस्तृत परिचय एवं वैदिक काल-गणना
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — भारतीय खगोल विज्ञान की अद्भुत धरोहर
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हिंदू पंचांग क्या है? — पांच अंगों का विस्तृत परिचय एवं वैदिक काल-गणना
तिथेश्च श्रियमाप्नोति वारादायुष्यवर्धनम्।
नक्षत्राद्धरते पापं योगाद्रोगनिवारणम्।
करणात्कार्यसिद्धिः स्यात् पञ्चाङ्गफलमुत्तमम्॥
नक्षत्राद्धरते पापं योगाद्रोगनिवारणम्।
करणात्कार्यसिद्धिः स्यात् पञ्चाङ्गफलमुत्तमम्॥
पंचांग श्रवण फल: तिथि के ज्ञान से लक्ष्मी, वार से दीर्घायु, नक्षत्र से पापमुक्ति, योग से रोग-निवारण और करण से कार्यसिद्धि प्राप्त होती है। यही पंचांग का दैनिक शुभ फल है।
📜 पंचांग के पांच मुख्य अंग
- १. तिथि (Tithi): सूर्य और चंद्रमा के बीच की 12 डिग्री की कोणीय दूरी को एक तिथि कहते हैं। माह में 30 तिथियां होती हैं।
- २. वार (Vaar): सप्ताह के सात दिन, जो सात प्रमुख ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) के नाम पर हैं।
- ३. नक्षत्र (Nakshatra): चंद्रमा 27.3 दिनों में भचक्र के जिन 27 तारा समूहों से गुजरता है, उन्हें 27 नक्षत्र कहा जाता है।
- ४. योग (Yoga): सूर्य और चंद्रमा के रेखांशों (Longitude) के योग से बनने वाले 27 विशेष संयोग, जैसे विष्कुंभ, प्रीति, आयुष्मान आदि।
- ५. करण (Karana): एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। कुल 11 करण होते हैं (बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि/भद्रा आदि)।
🌟 दैनिक जीवन में पंचांग का उपयोग
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति (चंद्र मास) और सूर्य के संक्रमण (सौर वर्ष) के बीच का परिष्कृत वैज्ञानिक समन्वय है। प्रातःकाल पंचांग पढ़ने अथवा सुनने से दिन की ऊर्जा और ग्रह स्थितियों का ज्ञान होता है, जिससे मनुष्य उचित समय पर सही निर्णय ले पाता है।