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नक्षत्र क्या होते हैं? — 27 नक्षत्रों का खगोलीय एवं आध्यात्मिक महत्व

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नक्षत्र क्या होते हैं? — 27 नक्षत्रों का खगोलीय एवं आध्यात्मिक महत्व

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नक्षत्र क्या होते हैं? — 27 नक्षत्रों का खगोलीय एवं आध्यात्मिक महत्व
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नक्षत्र क्या होते हैं? — 27 नक्षत्रों का खगोलीय एवं आध्यात्मिक महत्व

न क्षरतीति नक्षत्रम्।
यन्न क्षीयते कदाचिदपि तन्नक्षत्रमुच्यते॥
निरुक्त परिभाषा: जिसका कभी क्षय या नाश नहीं होता, जो आकाश में स्थिर और शाश्वत प्रकाशमान तारा समूह है, वही ‘नक्षत्र’ कहलाता है।

✨ 27 नक्षत्रों की पूर्ण सूची एवं उनके स्वामी

आकाश के 360 डिग्री भचक्र को 13 डिग्री 20 मिनट के 27 समान भागों में विभाजित किया गया है:

  1. अश्विनी (केतु) | २. भरणी (शुक्र) | ३. कृत्तिका (सूर्य) | ४. रोहिणी (चंद्र)
  2. मृगशिरा (मंगल) | ६. आर्द्रा (राहु) | ७. पुनर्वसु (गुरु) | ८. पुष्य (शनि)
  3. आश्लेषा (बुध) | १०. मघा (केतु) | ११. पूर्वाफाल्गुनी (शुक्र) | १२. उत्तराफाल्गुनी (सूर्य)
  4. हस्त (चंद्र) | १४. चित्रा (मंगल) | १५. स्वाति (राहु) | १६. विशाखा (गुरु)
  5. अनुराधा (शनि) | १८. ज्येष्ठा (बुध) | १९. मूल (केतु) | २०. पूर्वाषाढ़ा (शुक्र)
  6. उत्तराषाढ़ा (सूर्य) | २२. श्रवण (चंद्र) | २३. धनिष्ठा (मंगल) | २४. शतभिषा (राहु)
  7. पूर्वाभाद्रपद (गुरु) | २६. उत्तराभाद्रपद (शनि) | २७. रेवती (बुध)

(विशेष: 28वां सूक्ष्म नक्षत्र ‘अभिजित’ माना जाता है जो उत्तराषाढ़ा और श्रवण के मध्य स्थित है)।

🌟 पुष्य और रोहिणी का विशेष महत्व

समस्त नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा गया है। इसमें किया गया कोई भी शुभ कार्य, क्रय-विक्रय या स्वर्ण-खरीदी अक्षय समृद्धि प्रदान करती है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में और भगवान श्री राम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था।

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