Mahashivratri Significance Puja

हिंदू त्योहार

महाशिवरात्रि — शिव-पार्वती विवाह, रात्रि जागरण, चार प्रहर पूजा एवं महत्व

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — आदिदेव शिव और शक्ति के परम मिलन की महारात्रि

महाशिवरात्रि — शिव-पार्वती विवाह, रात्रि जागरण, चार प्रहर पूजा एवं महत्व

BHARTIYADOOT.COM • धर्म • संस्कृति • हमारी पहचान

महाशिवरात्रि — शिव-पार्वती विवाह, रात्रि जागरण, चार प्रहर पूजा एवं महत्व
卐 ॐ 卐

महाशिवरात्रि — शिव-पार्वती विवाह, रात्रि जागरण, चार प्रहर पूजा एवं महत्व

फाल्गुनस्य सिते पक्षे चतुर्दश्यां निशामुखे।
पूजयेत् शङ्करं देवं सर्वपापप्रणाशनम्॥
शिवपुराण वचन: फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी की महारात्रि में जो मनुष्य भगवान शिव का पूजन और जागरण करता है, वह समस्त जन्मों के पापों से मुक्त होकर शिवत्व को प्राप्त करता है।

🔱 महाशिवरात्रि के तीन प्रमुख धार्मिक प्रसंग

  1. शिव-पार्वती का पावन परिणय: वैरागी शिव का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ और वे गृहस्थ स्वरूप में प्रविष्ट हुए।
  2. ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य: ब्रह्मा और विष्णु के विवाद को शांत करने के लिए इसी रात्रि में अनादि, अनंत अग्नि-स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) प्रकट हुआ।
  3. हलाहल विषपान: समुद्र मंथन के कालकूट विष को भगवान शिव ने इसी रात्रि अपने कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की।

🌿 चार प्रहर की विशेष पूजा विधि

महाशिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहरों में बांटा जाता है: प्रथम प्रहर में दूध, द्वितीय में दही, तृतीय में शुद्ध घी और चतुर्थ प्रहर में शहद से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। अखंड दीप और बेलपत्र अर्पण के साथ “ॐ नमः शिवाय” का रात्रि जागरण अनंत गुना पुण्य प्रदान करता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top