Holi Festival Significance

हिंदू त्योहार

होली — रंगों, वसंत और भक्ति का पावन उत्सव, होलिका दहन एवं महत्व

अहंकार के दहन और ईश्वरीय शरणागति की विजय का सनातन रंगोत्सव

होली — रंगों, वसंत और भक्ति का पावन उत्सव, होलिका दहन एवं महत्व

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होली — रंगों, वसंत और भक्ति का पावन उत्सव, होलिका दहन एवं महत्व
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होली — रंगों, वसंत और भक्ति का पावन उत्सव, होलिका दहन एवं महत्व

अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः।
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव॥
होलिका पूजन मंत्र: हे होलिका! आप समस्त प्राणियों के अनिष्ट को भस्म करने वाली और कल्याण प्रदाता हैं। हम श्रद्धापूर्वक आपकी अग्नि का पूजन करते हैं।

🔥 भक्त प्रह्लाद और होलिका दहन की कथा

दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने जब अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से विमुख करने में असफलता पाई, तब उसने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि में न जलने का वरदान था) की गोद में प्रह्लाद को बिठाकर अग्नि में प्रवेश करा दिया। परंतु भगवान के प्रति अनन्य प्रेम के कारण प्रह्लाद सुरक्षित रहे और अधर्म की प्रतीक होलिका भस्म हो गई। यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य और भक्ति की सदा विजय होती है।

🎨 धुलेंडी और ब्रज की लठमार होली

फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन और अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को रंगों का उत्सव (धुलेंडी) मनाया जाता है। ब्रज, मथुरा और बरसाना में राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की प्रतीक लठमार और फूलों की होली विश्वप्रसिद्ध है। यह पर्व आपसी मतभेद भुलाकर सामाजिक समरसता और प्रेम को स्थापित करता है।

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