व्रत एवं उपवास
प्रदोष व्रत — शिव कृपा प्राप्ति का पावन व्रत, वार अनुसार महत्व एवं विधि
प्रत्येक त्रयोदशी तिथि का त्रिकाल वंदनीय शिव व्रत — समस्त मनोरथ सिद्धि
BHARTIYADOOT.COM • धर्म • संस्कृति • हमारी पहचान
卐 ॐ 卐
प्रदोष व्रत — शिव कृपा प्राप्ति का पावन व्रत, वार अनुसार महत्व एवं विधि
प्रदोषे शिवपूजायां यत्फलं लभते नरः।
न तत्क्रतुसहस्रेण प्राप्यते भुवि दुर्लभम्॥
न तत्क्रतुसहस्रेण प्राप्यते भुवि दुर्लभम्॥
शास्त्र प्रमाण: प्रदोष काल में भगवान शिव के पूजन से जो पुण्य फल प्राप्त होता है, वह पृथ्वी पर सहस्रों अश्वमेध यज्ञों से भी दुर्लभ है।
📅 वार के अनुसार प्रदोष का विशेष फल
- सोम प्रदोष: मानसिक शांति, आरोग्य और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति।
- भौम (मंगल) प्रदोष: ऋण से मुक्ति, साहस में वृद्धि और भूमि-भवन लाभ।
- बुध प्रदोष: विद्या, बुद्धि, व्यापार में सफलता और संतान सुख।
- गुरु प्रदोष: ज्ञान, सौभाग्य, गुरु कृपा और पितृ दोष निवारण।
- शुक्र प्रदोष: वैवाहिक सुख, ऐश्वर्य, सौंदर्य और लक्ष्मी कृपा।
- शनि प्रदोष: साढ़ेसाती-ढैया से मुक्ति, नौकरी में तरक्की और दीर्घायु।
- रवि प्रदोष: सूर्य के समान तेज, यश, पद-प्रतिष्ठा और आरोग्य।
🪔 प्रदोष काल पूजन विधि
सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक के समय को ‘प्रदोष काल’ कहा जाता है। इस काल में भगवान शिव नटराज स्वरूप में कैलाश पर आनंद तांडव करते हैं और समस्त देवता उनकी वंदना करते हैं। इस समय शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक कर बेलपत्र अर्पित करना अनंत फलदायी है।