व्रत एवं उपवास
सोमवार व्रत — विधि, नियम, सोलह सोमवार व्रत एवं आध्यात्मिक महत्व
भगवान भोलेनाथ की प्रसन्नता एवं मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करने का पावन व्रत
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सोमवार व्रत — विधि, नियम, सोलह सोमवार व्रत एवं आध्यात्मिक महत्व
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
शिव स्मरण: जो श्वेत कैलाश पर्वत के समान कांतिमान हैं, जिनके मस्तक पर सुंदर चंद्रमा सुशोभित है, उन प्रसन्नमुख भगवान महेश का हम नित्य ध्यान करते हैं।
🌿 सोमवार व्रत के प्रकार एवं विधि
सनातन परंपरा में सोमवार के तीन प्रमुख व्रत हैं:
- साधारण सोमवार व्रत: प्रत्येक मास के सोमवार को शिव कृपा हेतु।
- सौम्य प्रदोष सोमवार: त्रयोदशी युक्त सोमवार का विशेष व्रत।
- सोलह (16) सोमवार व्रत: श्रावण मास अथवा चैत्र मास से प्रारंभ कर 16 सप्ताह तक अखंड नियम पालन।
🪔 पूजन क्रम एवं प्रसाद
प्रातः स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर गंगाजल, अक्षत, सफेद चंदन, धतूरा और 11 या 21 बेलपत्र “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए अर्पित करें। सांध्यकाल में गेहूं के आटे की बाटी अथवा पंजीरी का चूरमा बनाकर तीन भाग करें—एक भाग गाय को, दूसरा भाग भक्तों में और तीसरा भाग स्वयं प्रसाद रूप में ग्रहण करें।