संत एवं ऋषि
महर्षि वेदव्यास — वेदों के संकलनकर्ता, 18 पुराण एवं महाभारत के अमर रचयिता
कृष्ण द्वैपायन — जिनके पावन प्राकट्य दिवस को सनातन जगत 'गुरु पूर्णिमा' के रूप में मनाता है
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महर्षि वेदव्यास — वेदों के संकलनकर्ता, 18 पुराण एवं महाभारत के अमर रचयिता
नमोऽस्तु ते व्यास विशालबुद्धे फुल्लारविन्दायतपत्रनेत्र।
येन त्वया भारततैलपूर्णः प्रज्वालितो ज्ञानमयः प्रदीपः॥
येन त्वया भारततैलपूर्णः प्रज्वालितो ज्ञानमयः प्रदीपः॥
व्यास वंदना: खिले हुए कमल के समान विशाल नेत्रों वाले, असीम बुद्धि के धनी महर्षि वेदव्यास को हमारा नमन, जिन्होंने महाभारत रूपी तेल से परिपूर्ण ज्ञान का अखंड दीपक प्रज्वलित किया।
📖 वेदों का विभाजन और विशाल साहित्य सृजन
महर्षि पराशर और माता सत्यवती के पुत्र कृष्ण द्वैपायन ने कलियुग में मनुष्यों की अल्प आयु और बुद्धि को देखकर एक अखंड वेद को चार भागों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) में विभाजित किया, जिससे उनका नाम ‘वेदव्यास’ पड़ा। इसके उपरांत उन्होंने ब्रह्मसूत्र, 18 महापुराण, 18 उपपुराण और एक लाख श्लोकों वाला महाभारत ग्रंथ रचा।
🌟 श्रीमद्भागवत और गुरु पूर्णिमा
इतने विशाल ग्रंथों की रचना के बाद भी जब व्यास जी का मन अशांत रहा, तब देवर्षि नारद की प्रेरणा से उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की विशुद्ध प्रेमाभक्ति से परिपूर्ण श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की। आषाढ़ पूर्णिमा को उनका जन्मोत्सव ‘व्यास पूर्णिमा’ और ‘गुरु पूर्णिमा’ के रूप में संपूर्ण भारत में मनाया जाता है।