देवी-देवता
भगवान विष्णु — चतुर्भुज स्वरूप, 10 प्रमुख अवतार एवं क्षीरसागर रहस्य
सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि — धर्म रक्षा, करुणा एवं दशावतार का दिव्य दर्शन
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भगवान विष्णु — चतुर्भुज स्वरूप, 10 प्रमुख अवतार एवं क्षीरसागर रहस्य
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
🐚 चतुर्भुज स्वरूप के आयुधों का रहस्य
भगवान विष्णु के चार हाथ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चार पुरुषार्थों का संचालन करते हैं:
- शंख (पाञ्चजन्य): धर्म की विजय ध्वनि और सत्य नाद का प्रतीक।
- सुदर्शन चक्र: कालचक्र, समय की शक्ति और अधर्म के संहार का प्रतीक।
- कौमोदकी गदा: असीम शक्ति, अनुशासन और अहंकार के मर्दन का प्रतीक।
- पद्म (कमल पुष्प): संसार के कीचड़ में रहकर भी पूर्णतः निर्लिप्त और पवित्र रहने का संदेश।
🌟 दशावतार (10 दिव्य अवतार) का क्रम
भगवान विष्णु ने जब-जब धर्म की हानि हुई, तब-तब अवतार ग्रहण किया: मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, श्री राम, श्री कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। यह क्रम सृष्टि में जीवन के जैविक और चेतनात्मक विकास का भी अद्भुत आध्यात्मिक प्रमाण है।