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राहुकाल क्या है? — गणना विधि, 7 दिनों का समय एवं सावधानियां
प्रतिदिन का अशुभ काल — नए व मांगलिक कार्यों में क्यों बरती जाती है सावधानी
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राहुकाल क्या है? — गणना विधि, 7 दिनों का समय एवं सावधानियां
राहुकाले शुभं कर्म न कुर्यात्तु कदाचन।
यत्कृतं तद्भवद्व्यर्थं विघ्नैश्च परिभूयते॥
यत्कृतं तद्भवद्व्यर्थं विघ्नैश्च परिभूयते॥
ज्योतिष नियम: राहुकाल में कभी भी नवीन व शुभ कार्य का आरंभ नहीं करना चाहिए। इस काल में प्रारंभ किया गया कार्य प्रायः विघ्नों से घिर जाता है अथवा निष्फल हो जाता है।
⏱️ राहुकाल की वैज्ञानिक गणना
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल समय को 8 बराबर भागों में बांटा जाता है (प्रत्येक भाग लगभग 1 घंटा 30 मिनट का होता है)। सूर्योदय यदि 6:00 AM और सूर्यास्त 6:00 PM माना जाए, तो सातों दिनों का राहुकाल इस प्रकार होता है:
- सोमवार: द्वितीय भाग (प्रातः 7:30 से 9:00 बजे तक)
- शनिवार: तृतीय भाग (प्रातः 9:00 से 10:30 बजे तक)
- शुक्रवार: चतुर्थ भाग (प्रातः 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक)
- बुधवार: पंचम भाग (दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक)
- गुरुवार: षष्ठ भाग (दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक)
- रविवार: सप्तम भाग (अपराह्न 4:30 से 6:00 बजे तक)
- मंगलवार: अष्टम भाग (दोपहर 3:00 से 4:30 बजे तक)
🌿 राहुकाल में क्या करें और क्या न करें
राहुकाल में नया व्यापार प्रारंभ करना, गृह प्रवेश, विवाह, यात्रा, रजिस्ट्री या स्वर्ण आभूषण खरीदना वर्जित है। परंतु जो कार्य पहले से चल रहे हों, वे जारी रखे जा सकते हैं। इस समय भगवान शिव, मां दुर्गा या भैरव जी का नाम जप अथवा महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है क्योंकि इससे राहु का दुष्प्रभाव शांत हो जाता है।