पूजा विधि
भगवान शिव की दैनिक पूजा विधि — अभिषेक, पंचामृत, बिल्वपत्र अर्पण एवं नियम
भोलेनाथ का सरलतम अभिषेक — जलाभिषेक से प्रसन्न होकर मोक्ष प्रदान करने वाले महादेव
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भगवान शिव की दैनिक पूजा विधि — अभिषेक, पंचामृत, बिल्वपत्र अर्पण एवं नियम
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
बिल्वाष्टकम श्लोक: तीन दलों (पत्तियों) से युक्त, सत्व-रज-तम त्रिगुणों के स्वरूप, भगवान शिव के त्रिनेत्र और त्रिशूल के समान तीन जन्मों के पापों को नष्ट करने वाला यह पावन बिल्वपत्र मैं भगवान शिव को अर्पित करता हूं।
🔱 शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या न चढ़ाएं
- क्या चढ़ाएं: शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा गाय का दूध, दही, शहद, शर्करा, भस्म, सफेद चंदन, अक्षत (अखंडित), धतूरा, भांग, शमी पत्र और बिना कटा-फटा तीन पत्तियों वाला बिल्वपत्र।
- क्या भूलकर भी न चढ़ाएं: तुलसी दल (जलंधर वध के कारण), केतकी के फूल (ब्रह्मा जी के झूठ का साक्षी बनने के कारण), हल्दी और रोली (स्त्री सौंदर्य प्रसाधन होने के कारण शिवलिंग पर वर्जित, केवल माता पार्वती को लगाएं), और शंख का जल (शंखचूड़ वध के कारण)।
🌿 अभिषेक का क्रम एवं परिक्रमा नियम
तांबे के लोटे से केवल जल चढ़ाएं (तांबे में दूध विष बन जाता है; दूध हेतु पीतल या चांदी का लोटा लें)। जल चढ़ाते समय उत्तर दिशा की ओर मुख करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग की केवल अर्ध-परिक्रमा की जाती है; कभी भी शिवलिंग की जलधारी (निर्मली) को नहीं लांघना चाहिए।