पूजा विधि
श्री गणेश पूजा विधि — सामग्री, कलश स्थापना, दुर्वा अर्पण एवं सरल मंत्र
किसी भी नए कार्य, गृह प्रवेश एवं नित्य आराधना में विघ्नहर्ता का प्रथम पूजन
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श्री गणेश पूजा विधि — सामग्री, कलश स्थापना, दुर्वा अर्पण एवं सरल मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणेश ध्यान: टेढ़ी सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी हे देव! आप सदा मेरे समस्त कार्यों को बिना किसी विघ्न के निर्विघ्न संपन्न करें।
🌿 गणेश पूजन की आवश्यक सामग्री एवं दुर्वा महिमा
सामग्री सूची: रोली, अक्षत, कलावा (मौली), जनेऊ, लाल सिन्दूर, पंचामृत, गंगाजल, 21 गांठें हरी दूर्वा, पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, इलायची, मोदक अथवा बेसन के लड्डू।
दूर्वा का महत्व: गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। अनलासुर राक्षस को निगलने के बाद गणेश जी के उदर में उत्पन्न ज्वाला को शांत करने के लिए ऋषियों ने उन्हें 21 दूर्वा दल अर्पित किए थे। “ॐ गं गणपतये नमः” बोलते हुए दूर्वा के जोड़ों को गणेश जी के मस्तक पर अर्पित करें (चरणों में नहीं)।
दूर्वा का महत्व: गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। अनलासुर राक्षस को निगलने के बाद गणेश जी के उदर में उत्पन्न ज्वाला को शांत करने के लिए ऋषियों ने उन्हें 21 दूर्वा दल अर्पित किए थे। “ॐ गं गणपतये नमः” बोलते हुए दूर्वा के जोड़ों को गणेश जी के मस्तक पर अर्पित करें (चरणों में नहीं)।
🪔 पूजन का सरल क्रम
१. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या सुपारी के गणेश जी स्थापित करें। २. जल और पंचामृत से स्नान कराएं। ३. सिन्दूर और अक्षत लगाएं तथा जनेऊ पहनाएं। ४. 21 दूर्वा और लाल पुष्प अर्पित करें। ५. मोदक का भोग लगाएं। ६. अंत में कपूर जलाकर “जय गणेश जय गणेश देवा” आरती करें।