योग एवं आध्यात्म
प्राणायाम का परिचय — प्राण ऊर्जा का संतुलन, नाड़ी शोधन, भस्त्रिका एवं कपालभाति
श्वास और मन का गहरा संबंध — प्राण शक्ति के नियमन से समस्त व्याधियों की निवृत्ति
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प्राणायाम का परिचय — प्राण ऊर्जा का संतुलन, नाड़ी शोधन, भस्त्रिका एवं कपालभाति
चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत्।
योगी स्थाणुत्वमाप्नोति ततो वायुं निरोधयेत्॥
योगी स्थाणुत्वमाप्नोति ततो वायुं निरोधयेत्॥
हठयोग प्रदीपिका वचन: जब तक श्वास चंचल रहता है, तब तक चित्त (मन) भी चंचल रहता है। श्वास के स्थिर होते ही मन शांत हो जाता है। अतः मन को जीतने के लिए वायु (प्राण) का नियमन आवश्यक है।
🌬️ तीन प्रमुख नाड़ियां (इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना)
मानव शरीर में 72,000 नाड़ियां हैं, जिनमें तीन मुख्य हैं:
- इड़ा (चंद्र नाड़ी): बायां स्वर, शीतलता, अंतर्मुखी चिंतन और शांति का प्रतीक।
- पिंगला (सूर्य नाड़ी): दायां स्वर, ताप, ऊर्जा, पाचन शक्ति और कर्मठता का प्रतीक।
- सुषुम्ना (मध्य नाड़ी): जब दोनों स्वर संतुलित होते हैं, तब सुषुम्ना जाग्रत होती है और कुंडलिनी शक्ति का ऊर्ध्वगमन होता है।
🌿 प्रमुख प्राणायाम एवं उनकी सावधानियां
अनुलोम-विलोम (नाड़ी शोधन): मन को परम शांत करता है। कपालभाति: शरीर के विषैले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालता है। भ्रामरी: मस्तिष्क को शांति और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है। प्राणायाम सदैव प्रातःकाल खाली पेट, खुले हवादार स्थान पर, रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर करना चाहिए।