हिंदू त्योहार
दीपावली — प्रकाश पर्व का धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का महापर्व — 5 दिवसीय दीपोत्सव
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दीपावली — प्रकाश पर्व का धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं सुखसम्पदम्।
द्वेषबुद्धिविनाशाय आत्मज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं सुखसम्पदम्।
द्वेषबुद्धिविनाशाय आत्मज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
दीपक प्रार्थना: दीपक की ज्योति साक्षात परब्रह्म स्वरूप है। वह समस्त पापों, अज्ञान और अंधकार को हरने वाली है। हे दीपज्योति! हमारे जीवन में कल्याण, आरोग्य और सुख-समृद्धि का संचार करें।
🪔 5 दिवसीय दीपोत्सव का आध्यात्मिक क्रम
दीपावली केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि पंचदिवसीय महापर्व है:
- धनतेरस (धनत्रयोदशी): आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वन्तरि का प्राकट्य दिवस एवं यम दीपदान।
- नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली): भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर वध एवं सौंदर्य-स्नान।
- दीपावली (लक्ष्मी पूजन): समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्राकट्य, श्रीराम का 14 वर्ष बाद अयोध्या आगमन।
- गोवर्धन पूजा (अन्नकूट): भगवान श्री कृष्ण द्वारा इंद्र का मानमर्दन एवं प्रकृति-गो संवर्धन।
- भाई दूज (यम द्वितीया): यमराज और यमुना जी के पावन भ्रातृ-प्रेम का उत्सव।
🌟 अंतःकरण के प्रकाश का संदेश
दीपावली केवल बाह्य दीप प्रज्वलित करने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ और अहंकार रूपी अंधकार को समाप्त कर ज्ञान और प्रेम का दीप जलाने की सनातन प्रेरणा है। इस रात्रि में मां महालक्ष्मी और भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करने से घर में स्थाई सुख-शांति का वास होता है।