संत एवं ऋषि
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य — अद्वैत वेदांत के प्रणेता, 4 पीठ एवं भारत की आध्यात्मिक एकता
मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में वैदिक धर्म का पुनरुद्धार करने वाले भगवान शिव के साक्षात अवतार
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जगद्गुरु आदि शंकराचार्य — अद्वैत वेदांत के प्रणेता, 4 पीठ एवं भारत की आध्यात्मिक एकता
अद्वैतं परमानन्दं शुद्धं ज्ञानमयं शिवम्।
शङ्करं शङ्कराचार्यं केशवं बादरायणम्॥
सूत्रभाष्यकृतौ वन्दे भगवन्तौ पुनः पुनः॥
शङ्करं शङ्कराचार्यं केशवं बादरायणम्॥
सूत्रभाष्यकृतौ वन्दे भगवन्तौ पुनः पुनः॥
आचार्य वंदना: साक्षात भगवान शिव के स्वरूप, अद्वैत वेदांत के भाष्यकार जगद्गुरु आदि शंकराचार्य और व्यास स्वरूप भगवान केशव को हमारा बारंबार नमन।
🕉️ अद्वैत वेदांत का अमर सिद्धांत
आदि शंकराचार्य ने प्रस्थानत्रयी (उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और गीता) पर अकाट्य भाष्यों की रचना की। उनका मूल दर्शन तीन पंक्तियों में समाहित है: “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः”—केवल परब्रह्म ही शाश्वत सत्य है, यह नाम-रूपात्मक जगत नश्वर (परिवर्तनशील) है, और जीवात्मा वस्तुतः ब्रह्म से भिन्न नहीं, साक्षात ब्रह्म ही है।
🧭 चार दिशाओं में चार आम्नाय पीठ
केरल के कालडी में जन्मे शंकराचार्य ने पूरे भारत की पदयात्रा की। उन्होंने उत्तर में ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ), दक्षिण में शृंगेरी शारदा पीठ, पूर्व में गोवर्धन मठ (पुरी) और पश्चिम में द्वारका शारदा पीठ की स्थापना कर भारत की सनातन अस्मिता को एक सूत्र में बांधा। केदारनाथ धाम में 32 वर्ष की आयु में उन्होंने समाधि ग्रहण की।