संत एवं ऋषि
गोस्वामी तुलसीदास — रामचरितमानस के अमर रचयिता एवं भक्ति आंदोलन के देदीप्यमान सूर्य
संस्कृत के गूढ़ ज्ञान को अवधी में जन-जन तक पहुंचाने वाले महर्षि वाल्मीकि के कलयुगी अवतार
BHARTIYADOOT.COM • धर्म • संस्कृति • हमारी पहचान
卐 ॐ 卐
गोस्वामी तुलसीदास — रामचरितमानस के अमर रचयिता एवं भक्ति आंदोलन के देदीप्यमान सूर्य
वाल्मीकिस्तुलसीदासः कलौ देहे प्रचेतसः।
चकार रामचरितं मानसं लोकपावनम्॥
चकार रामचरितं मानसं लोकपावनम्॥
नाभादास कृत भक्तमाल वचन: त्रेतायुग के महर्षि वाल्मीकि ही कलियुग में तुलसीदास के रूप में अवतरित हुए और उन्होंने लोक-कल्याण हेतु अमृतमयी श्री रामचरितमानस की रचना की।
🏹 पत्नी की एक सीख और वैराग्य का प्राकट्य
राजापुर (चित्रकूट) में जन्मे तुलसीदास जी का अपनी पत्नी रत्नावली से अत्यधिक मोह था। एक बार जब वे उफनती नदी पार कर ससुराल पहुंचे, तो पत्नी ने व्यंग्य किया: “लाज न लागत आपको, दौरे आयहु साथ। धिक-धिक ऐसे प्रेम को, कहा कहौं मैं नाथ॥ अस्थि-चर्म-मय देह यह, तासों ऐसी प्रीति। नेकु जो होती राम महं, तो नहिं भव-भीत॥” यह दोहा सुनते ही तुलसीदास जी का मोह भंग हो गया और वे प्रभु श्रीराम की अनन्य भक्ति में लीन हो गए।
📜 अमर कालजयी कृतियां
काशी के असी घाट पर उन्होंने भगवान शिव की प्रेरणा से श्री रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, दोहावली, गीतावली, जानकी मंगल और हनुमान चालीसा की रचना की। मानस केवल एक काव्य नहीं, बल्कि भारतीय समाज का पारिवारिक और नैतिक आदर्श ग्रंथ है।