पंचांग एवं मुहूर्त
तिथि क्या होती है? — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की 15 तिथियां एवं उनका महत्व
प्रतिपदा से पूर्णिमा और अमावस्या तक — चंद्रमा की कलाओं और तिथियों का विज्ञान
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तिथि क्या होती है? — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की 15 तिथियां एवं उनका महत्व
प्रतिपद्यापि या तिथिः सा ज्ञेया चन्द्रवृद्धितः।
शुक्ले च वर्धते चन्द्रः कृष्णे हीयते सर्वदा॥
शुक्ले च वर्धते चन्द्रः कृष्णे हीयते सर्वदा॥
🌓 पक्ष और तिथियों का विभाजन
प्रत्येक हिंदू मास में दो पक्ष होते हैं:
- शुक्ल पक्ष (Bright Fortnight): अमावस्या के अगले दिन से पूर्णिमा तक, जब चंद्रमा का आकार प्रतिदिन बढ़ता है।
- कृष्ण पक्ष (Dark Fortnight): पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस्या तक, जब चंद्रमा का आकार प्रतिदिन घटता है।
15 प्रमुख तिथियों के नाम: प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी (छठ), सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस), और पूर्णिमा/अमावस्या।
🌟 तिथियों के पांच वर्ग (नंदा, भद्रा आदि)
शास्त्रों में तिथियों को 5 स्वभाव वर्गों में बांटा गया है: नंदा (1, 6, 11 – आनंद प्रदाता), भद्रा (2, 7, 12 – शुभ कार्य), जया (3, 8, 13 – विजय और पराक्रम), रिक्ता (4, 9, 14 – इनमें शुभ कार्य वर्जित हैं), और पूर्णा (5, 10, 15/30 – संपूर्ण सिद्धिदायक)।