व्रत एवं उपवास
एकादशी व्रत — नियम, पारण विधि, वर्ष की 24 एकादशियों का महत्व
समस्त व्रतों का राजा — भगवान श्री हरि विष्णु की परम प्रिय पावन तिथि
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एकादशी व्रत — नियम, पारण विधि, वर्ष की 24 एकादशियों का महत्व
न गाङ्गासदृशं तीर्थं न देवः केशवात्परः।
न चैकादशीसमं किञ्चित् पावनं विद्यते भुवि॥
न चैकादशीसमं किञ्चित् पावनं विद्यते भुवि॥
शास्त्र प्रमाण: जिस प्रकार गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं और भगवान केशव के समान कोई देव नहीं, उसी प्रकार पृथ्वी पर एकादशी के समान कोई परम पावन व्रत नहीं है।
🌾 एकादशी व्रत के प्रमुख नियम
- दशमी के नियम: दशमी तिथि की सांध्यकाल से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- एकादशी के दिन: अन्न, चावल, दाल और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें। फलाहार (दूध, फल, कूटू, सिंघाड़ा) का सेवन करें।
- रात्रि जागरण: एकादशी की रात्रि में श्री हरि के नाम का संकीर्तन एवं भजन करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
- द्वादशी पारण: द्वादशी तिथि के सूर्योदय के उपरांत और हरिवासर समाप्त होने के बाद ही ब्राह्मण को दान देकर व्रत खोलें।
🌟 वर्ष की प्रमुख एकादशियां
वर्ष में कुल 24 एकादशियां (और अधिकमास में 26) होती हैं। इनमें निर्जला एकादशी, देवशयनी एकादशी, देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी, षट्तिला एकादशी और कामदा एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। एकादशी व्रत करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होकर वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।