हिंदू धर्मग्रंथ
उपनिषद — वेदांत का आध्यात्मिक ज्ञान, मुख्य 10 उपनिषद एवं महावाक्य
ब्रह्म, आत्मा और जगत के चरम सत्य का साक्षात्कार — उपनिषदों का अमृत चिंतन
BHARTIYADOOT.COM • धर्म • संस्कृति • हमारी पहचान
卐 ॐ 卐
उपनिषद — वेदांत का आध्यात्मिक ज्ञान, मुख्य 10 उपनिषद एवं महावाक्य
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ईशावास्योपनिषद शांति पाठ: वह परब्रह्म पूर्ण है, यह जगत भी पूर्ण है। उस पूर्ण से ही यह पूर्ण प्रकट हुआ है। पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लेने पर भी केवल पूर्ण ही शेष रहता है।
📜 उपनिषद शब्द का अर्थ एवं 10 मुख्य उपनिषद
‘उपनिषद’ तीन शब्दों से बना है: उप (समीप), नि (निष्ठापूर्वक), षद् (बैठना)। अर्थात् शिष्य का गुरु के समीप निष्ठापूर्वक बैठकर आत्मज्ञान प्राप्त करना। कुल 108 उपनिषदों में आदि शंकराचार्य ने जिन 10 पर भाष्य लिखा, वे दशोपनिषद कहलाते हैं:
- ईश: निष्काम कर्म और ईश्वर की सर्वव्यापकता।
- केन: इंद्रियों और मन को शक्ति देने वाला परम तत्व कौन है?
- कठ: नचिकेता और यमराज का अमर संवाद — मृत्यु का रहस्य।
- प्रश्न: छह ऋषियों के महर्षि पिप्पलाद से जीवन संबंधी प्रश्न।
- मुण्डक: परा और अपरा विद्या, ‘सत्यमेव जयते’ का मूल स्रोत।
- माण्डूक्य: चेतना की चार अवस्थाएं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय) और ॐकार साधना।
- तैत्तिरीय: पंचकोश (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय, आनंदमय) का विज्ञान।
- ऐतरेय: सृष्टि की उत्पत्ति और चेतना का विस्तार।
- छांदोग्य: ‘तत्त्वमसि’ (वह तुम ही हो) का दिव्य उपदेश।
- बृहदारण्यक: ‘असतो मा सद्गमय’ और याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद।
🌟 चार वेदों के चार महावाक्य
उपनिषदों का चरम निष्कर्ष इन चार महावाक्यों में समाहित है: १. प्रज्ञानं ब्रह्म (ऋग्वेद – चेतना ही ब्रह्म है), २. अहं ब्रह्मास्मि (यजुर्वेद – मैं ब्रह्म हूँ), ३. तत्त्वमसि (सामवेद – वह परमात्मा तुम ही हो), और ४. अयमात्मा ब्रह्म (अथर्ववेद – यह जीवात्मा साक्षात ब्रह्म है)।