मंत्र
श्री राम मंत्र — 'रामाय नमः' एवं तारक मंत्र की असीम महिमा
भवसागर से तारने वाला पावन राम नाम — अर्थ, महत्व एवं साधना
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श्री राम मंत्र — 'रामाय नमः' एवं तारक मंत्र की असीम महिमा
ॐ रां रामाय नमः
श्री राम जय राम जय जय राम
श्री राम जय राम जय जय राम
सरल भावार्थ: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी को हमारा बारंबार प्रणाम। राम नाम समस्त लोकों में सर्वश्रेष्ठ और मोक्षदाता है।
🚩 ‘राम’ नाम का आध्यात्मिक बीज विज्ञान
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है:
“कहुं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई॥”
राम शब्द दो अक्षरों से बना है: ‘रा’ और ‘म’। ‘रा’ अग्नि बीज (रं) है जो हमारे समस्त संचित पापों को भस्म करता है, और ‘म’ चंद्रमा का सुधा बीज है जो अंतःकरण को दिव्य शांति प्रदान करता है।
“कहुं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई॥”
राम शब्द दो अक्षरों से बना है: ‘रा’ और ‘म’। ‘रा’ अग्नि बीज (रं) है जो हमारे समस्त संचित पापों को भस्म करता है, और ‘म’ चंद्रमा का सुधा बीज है जो अंतःकरण को दिव्य शांति प्रदान करता है।
🪔 नाम जप की महिमा
कलियुग में केवल राम नाम का आश्रय ही भवसागर से पार लगाने में समर्थ है—“कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा”। तुलसी की माला पर नित्य राम नाम का जप करने से साधक को परम शांति और श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।