Shiv Aarti

आरती

श्री शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा

देवाधिदेव महादेव शिव शंकर की पावन एवं सर्वमंगलकारी आरती

श्री शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा

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श्री शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा
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श्री शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसमुख अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

🔱 शिव आरती का दार्शनिक रहस्य

यह आरती केवल स्तुति नहीं, बल्कि सनातन अद्वैत दर्शन का सार है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सृष्टि के सृजनकर्ता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु और संहारकर्ता शिव—ये तीनों प्रणवाक्षर (ॐ) के अंतर्गत एक ही परब्रह्म के तीन स्वरूप हैं। भगवान शिव अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रकृति और पुरुष के शाश्वत संतुलन का प्रतीक हैं।

🌿 अभिषेक एवं नित्य वंदना

भगवान शिव की आरती में कर्पूर (कपूर) की आरती का विशेष महत्व माना गया है। “कर्पूरगौरं करुणावतारं” मंत्र के साथ आरती करने से घर के समस्त वास्तु दोष, नकारात्मक ऊर्जा और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। सोमवार एवं प्रदोष के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

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