मंदिर एवं तीर्थ
श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी — रहस्य, रथयात्रा परंपरा एवं महाप्रसाद महात्म्य
कलियुग के साक्षात वैकुंठ — जहां काष्ठ विग्रह में धड़कता है भगवान श्री कृष्ण का हृदय
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श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी — रहस्य, रथयात्रा परंपरा एवं महाप्रसाद महात्म्य
नीलाचलनिवासाय नित्याय परमात्मने।
सुभद्राप्राणनाथाय जगन्नाथाय ते नमः॥
सुभद्राप्राणनाथाय जगन्नाथाय ते नमः॥
जगन्नाथ वंदना: नीलाचल पर्वत पर निवास करने वाले, नित्य सनातन परमात्मा, बहन सुभद्रा और भ्राता बलभद्र के साथ विराजमान जगत के स्वामी श्री जगन्नाथ जी को हमारा कोटि-कोटि प्रणाम।
🌊 मंदिर के 7 आश्चर्यजनक अलौकिक रहस्य
- ध्वज का विपरीत दिशा में लहराना: मंदिर के शिखर का ध्वज सदा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है।
- सुदर्शन चक्र का कोण: शिखर पर स्थित नीलचक्र को पुरी के किसी भी कोने से देखें, वह सदैव सामने से ही दिखाई देता है।
- कोई छाया नहीं: दिन के किसी भी समय मुख्य मंदिर की छाया जमीन पर नहीं पड़ती।
- समुद्र की ध्वनि का लोप: मंदिर के सिंहद्वार में पहला कदम रखते ही समुद्र की गर्जना पूर्णतः शांत हो जाती है।
- पक्षी नहीं उड़ते: इस मंदिर के ऊपर से कभी कोई पक्षी या विमान नहीं उड़ता।
- अलौकिक महाप्रसाद: मिट्टी के 7 बर्तनों को एक के ऊपर एक रखकर पकाया जाता है, और सबसे ऊपर वाले बर्तन का अन्न सबसे पहले पकता है।
- ब्रह्म पदार्थ: हर 12 वर्ष में ‘नव कलेवर’ के समय मूर्ति बदलते समय अंधेरे में एक अत्यंत गुप्त ‘ब्रह्म पदार्थ’ (जो कृष्ण का धड़कता हृदय माना जाता है) पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में स्थापित किया जाता है।
🚩 विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को महाप्रभु जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने रथों (नंदीघोष, तालध्वज, दर्पदलन) पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। यह एकमात्र ऐसा उत्सव है जहां भगवान स्वयं गर्भगृह से बाहर निकलकर अपने भक्तों, दीनों और चांडालों तक को दर्शन देते हैं।