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महाभारत — विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य, 18 पर्व एवं 'यतो धर्मस्ततो जयः'
महर्षि वेदव्यास रचित ज्ञान का महासागर — जहां धर्म, नीति, राजनीति और मोक्ष का संगम है
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महाभारत — विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य, 18 पर्व एवं 'यतो धर्मस्ततो जयः'
धर्मे चार्थे च कामे च मोक्षे च भरतर्षभ।
यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्॥
यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्॥
महाभारत की अमर घोषणा: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के विषय में जो कुछ इस महाभारत में है, वही संसार में अन्यत्र है; और जो इसमें नहीं है, वह इस संसार में कहीं भी विद्यमान नहीं है।
⚔️ महाभारत के 18 पावन पर्व
एक लाख श्लोकों (शतसाहस्री संहिता) वाला यह ग्रंथ 18 पर्वों में विभक्त है:
- १. आदि पर्व: वंश परंपरा एवं जन्म कथाएं
- २. सभा पर्व: द्यूत क्रीड़ा एवं द्रौपदी चीरहरण
- ३. वन पर्व: पांडवों का 12 वर्ष का वनवास
- ४. विराट पर्व: 1 वर्ष का अज्ञातवास
- ५. उद्योग पर्व: शांति दूत श्री कृष्ण और युद्ध की तैयारी
- ६. भीष्म पर्व: 10 दिन का युद्ध एवं श्रीमद्भगवद्गीता उपदेश
- ७. द्रोण पर्व: चक्रव्यूह एवं अभिमन्यु वध
- ८. कर्ण पर्व: कर्ण का सेनापतित्व और वध
- ९. शल्य पर्व: दुर्योधन वध एवं युद्ध समाप्ति
- १०. सौप्तिक पर्व: अश्वत्थामा द्वारा रात्रि में शिविर संहार
- ११. स्त्री पर्व: गांधारी का विलाप एवं शाप
- १२. शांति पर्व: शरशैया पर भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को राजधर्म का उपदेश
- १३. अनुशासन पर्व: दान, धर्म और विष्णु सहस्रनाम
- १४. अश्वमेधिक पर्व: युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ
- १५. आश्रमवासिक पर्व: धृतराष्ट्र, गांधारी व कुंती का वन गमन
- १६. मौसल पर्व: यदुवंश का संहार
- १७. महाप्रस्थानिक पर्व: पांडवों का हिमालय गमन
- १८. स्वर्गारोहण पर्व: युधिष्ठिर का सशरीर स्वर्ग गमन
🌟 जीवन का अमर संदेश
महाभारत केवल पांडवों और कौरवों के युद्ध की कथा नहीं, बल्कि मानव स्वभाव के गुण-दोषों का दर्पण है। इसका अंतिम सत्य है: “यतो धर्मस्ततो जयः”—जहां धर्म है, वहां श्री कृष्ण हैं; और जहां श्री कृष्ण हैं, विजय वहीं निश्चित है।