मंदिर एवं तीर्थ
12 ज्योतिर्लिंग — भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का सम्पूर्ण दर्शन एवं महत्व
सौराष्ट्र से रामेश्वरम तक — भगवान शिव के 12 स्वयंभू ज्योति-स्तंभों की महिमा
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12 ज्योतिर्लिंग — भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का सम्पूर्ण दर्शन एवं महत्व
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥१॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥२॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥३॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥१॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥२॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥३॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र: जो मनुष्य प्रातः एवं संध्याकाल में इन 12 पावन ज्योतिर्लिंगों के नामों का स्मरण करता है, उसके सात जन्मों के संचित पापों का तत्काल नाश हो जाता है।
🔱 12 ज्योतिर्लिंगों के पावन स्थान एवं महिमा
- सोमनाथ (गुजरात): प्रथम ज्योतिर्लिंग, जहां चंद्रदेव ने अपने क्षय रोग से मुक्ति पाई थी।
- मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश): श्रीशैल पर्वत पर स्थित, जहां शिव और पार्वती दोनों निवास करते हैं।
- महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश): एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग, जो काल के भी महाकाल हैं।
- ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश): नर्मदा नदी के बीच ॐ आकार के मांधाता द्वीप पर स्थित।
- केदारनाथ (उत्तराखंड): हिमालय की गोद में मंदाकिनी तट पर स्थित मोक्षधाम।
- भीमाशंकर (महाराष्ट्र): सह्याद्रि पर्वत पर भीमा नदी के उद्गम पर स्थित।
- काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): मोक्षदायिनी काशी में गंगा तट पर स्थित ज्योतिर्लिंग।
- त्र्यंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र): गोदावरी के उद्गम पर स्थित, जहां ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों के मुख हैं।
- वैद्यनाथ (देवघर, झारखंड): जहां रावण ने शिवजी की घोर तपस्या कर वरदान पाया था।
- नागेश्वर (द्वारका, गुजरात): दारुकावन में स्थित, जो विष और सर्प भय से मुक्त करता है।
- रामेश्वरम (तमिलनाडु): जहां भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व शिवलिंग की स्थापना की थी।
- घृष्णेश्वर (संभाजीनगर, महाराष्ट्र): 12वां ज्योतिर्लिंग, जो एलोरा की पावन गुफाओं के निकट स्थित है।
🌿 ज्योतिर्लिंग दर्शन का आध्यात्मिक फल
शिवपुराण के कोटिरुद्र संहिता के अनुसार ज्योतिर्लिंग साक्षात निर्गुण ब्रह्म का सगुण ज्योति-स्वरूप है। इन पवित्र तीर्थों की यात्रा अथवा मात्र श्रद्धापूर्वक इनके नामों का नित्य स्मरण आत्मा को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर शिवलोक प्रदान करता है।