व्रत एवं उपवास
पूर्णिमा व्रत — श्री सत्यनारायण पूजन, चंद्र अर्घ्य एवं 12 पूर्णिमा महत्व
चंद्रमा की पूर्ण कलाओं का पावन पर्व — सुख, समृद्धि और आत्मशांति का व्रत
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पूर्णिमा व्रत — श्री सत्यनारायण पूजन, चंद्र अर्घ्य एवं 12 पूर्णिमा महत्व
क्षीरोदार्णवसम्भूते अत्रेर्नेत्रसमुद्भव।
गृहाणार्घ्यं शशाङ्केश रोहिण्यासहितो मम॥
गृहाणार्घ्यं शशाङ्केश रोहिण्यासहितो मम॥
चंद्र अर्घ्य मंत्र: हे क्षीरसागर से उत्पन्न, महर्षि अत्रि के नेत्रों से प्रादुर्भूत, रोहिणी के पति चंद्रमा! आप कृपा करके मेरा यह अर्घ्य स्वीकार करें।
🌕 पूर्णिमा व्रत के नियम एवं सत्यनारायण कथा
पूर्णिमा तिथि प्रकृति और मानव शरीर में जल तत्व के पूर्ण संतुलन की तिथि है। इस दिन व्रत रखकर भगवान श्री सत्यनारायण की कथा सुनना सनातन धर्म की अति प्राचीन परंपरा है। पंजिरी (गेहूं का भुना आटा, चीनी और तुलसी दल), पंचामृत और केले का प्रसाद बनाकर परिवार सहित कथा श्रवण करने से घर का वातावरण शांत और पवित्र होता है।
🌟 वर्ष की प्रमुख पूर्णिमा तिथियां
वर्ष में 12 पूर्णिमाएं होती हैं, जिनमें शरद पूर्णिमा (अमृत वर्षा), गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली), और माघ पूर्णिमा का महात्म्य शास्त्रों में सर्वोच्च कहा गया है। रात्रि में चंद्रमा को कच्चे दूध मिश्रित जल का अर्घ्य देने से मानसिक तनाव और अनिद्रा का निवारण होता है।