BHARATIYADOOT धर्म | संस्कृति | हमारी पहचान

Gayatri Mantra

सम्पूर्ण आरती, हिन्दी भावार्थ एवं नित्य पूजा विधि

मंत्र

गायत्री मंत्र — शुद्ध संस्कृत पाठ, पदच्छेद, भावार्थ एवं जप विधि

सनातन धर्म का सर्वश्रेष्ठ महामंत्र — बुद्धि, तेज और आत्मज्ञान की प्राप्ति

गायत्री मंत्र — शुद्ध संस्कृत पाठ, पदच्छेद, भावार्थ एवं जप विधि

BHARTIYADOOT.COM • धर्म • संस्कृति • हमारी पहचान

गायत्री मंत्र — शुद्ध संस्कृत पाठ, पदच्छेद, भावार्थ एवं जप विधि
卐 ॐ 卐

गायत्री मंत्र — शुद्ध संस्कृत पाठ, पदच्छेद, भावार्थ एवं जप विधि

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
सरल भावार्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंतःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।

🕉️ शब्दशः पद-विश्लेषण

  • ॐ (Om): परब्रह्म का शाश्वत नाद
  • भूः (Bhuh): भूलोक, प्राणस्वरूप
  • भुवः (Bhuvah): अंतरिक्ष, दुःखनाशक
  • स्वः (Svah): स्वर्गलोक, आनंदस्वरूप
  • तत् (Tat): वह परमात्मा
  • सवितुः (Savituh): सूर्यदेव, समस्त जगत के उत्पादक
  • वरेण्यम् (Varenyam): वरण करने योग्य, सर्वश्रेष्ठ
  • भर्गः (Bhargah): शुद्ध चेतन तेज, पापनाशक प्रकाश
  • देवस्य (Devasya): दिव्य स्वरूप के
  • धीमहि (Dheemahi): हम ध्यान करते हैं
  • धियः (Dhiyah): बुद्धियों को
  • यः (Yah): जो परमात्मा
  • नः (Nah): हमारी
  • प्रचोदयात् (Prachodayat): सन्मार्ग में प्रेरित करे

🌅 जप के नियम एवं वैज्ञानिक लाभ

गायत्री मंत्र का जप प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्याकाल में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला से करना सर्वश्रेष्ठ है। आधुनिक न्यूरोसाइंस अनुसंधानों ने भी सिद्ध किया है कि गायत्री मंत्र के लयबद्ध उच्चारण से मस्तिष्क की तरंगें शांत होती हैं, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव का पूर्णतः शमन होता है।

संबंधित पावन रचनाएं

श्रद्धालु टिप्पणियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *